आनंदपुर साहिब में अवैध खनन पर प्रशासनिक शिकंजा: 20 दिनों में 5 एफआईआर दर्ज, 70 से अधिक ओवरलोडेड टिपरों के चालान
रूपनगर जिले की आनंदपुर साहिब सब-डिवीजन में पुलिस और खनन विभाग ने अवैध खनन तथा गैर-कानूनी तरीके से सामग्री ढोने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पिछले 20 दिनों के दौरान चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत प्रशासन ने 5 एफआईआर दर्ज की हैं और ओवरलोडिंग करने वाले 70 से अधिक वाहनों के चालान काटे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओवरलोडिंग के लिए न्यूनतम चालान 20,000 रुपये निर्धारित है। इसके अलावा, खनन विभाग ने पुलिस की मदद से चार मॉडिफाइड बॉडी वाले टिपरों पर 2.5-2.5 लाख रुपये के भारी-भरकम चालान भी किए हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल के दौरान मॉडिफाइड टिपरों पर लगाया गया यह सबसे बड़ा जुर्माना है। खनन माफिया द्वारा अधिक मुनाफा कमाने के लालच में टिपरों को तय क्षमता से अधिक ओवरलोड किया जाता है। बिना आवश्यक परमिट और टैक्स के सामान की ढुलाई करने से सरकार को जीएसटी (GST) और रॉयल्टी के रूप में राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके साथ ही, ओवरलोडेड वाहनों के सड़कों पर दौड़ने से सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। हालांकि, इस सख्त अभियान के बावजूद व्यवस्था की कई बड़ी खामियां भी खुलकर सामने आई हैं। इलाके में बिना पंजीकरण के चल रहे टिपर और एक्सकेवेटर (खुदाई वाली मशीनें) अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, यदि मशीनरी और वाहन बिना किसी मालिकाना रिकॉर्ड के चलाए जाते हैं, तो उनके ऑपरेटरों की पहचान करना और पूरी सप्लाई चेन का पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है। सूत्रों का कहना है कि केवल सड़कों पर वाहनों को रोकना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक खनन स्थलों, लोडिंग पॉइंट और स्टॉकयार्डों की मुकम्मल निगरानी किया जाना बेहद जरूरी है। अधिकारियों को वाहनों के पंजीकरण, खनन मंजूरी, कागजातों और सामग्री के स्रोत की गहराई से जांच करनी चाहिए। खनन के मुख्य गढ़ माने जाने वाले आनंदपुर साहिब में हुई इस हालिया कार्रवाई ने अवैध खनन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या यह सख्ती भविष्य में भी लगातार जारी रहेगी या नहीं।