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सब्जी या गैस सिलेंडर खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर; सब्सिडी पाने के लिए अब बॉयोमीट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य

30 Sep, 2026 06:20 PM

हर महीने की पहली तारीख की तरह इस बार भी 1 अक्टूबर 2026 से कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इन नए बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों की जेब और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है। मुख्य रूप से एलपीजी सब्सिडी, बैंकिंग सेवाओं और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में यह फेरबदल किया जा रहा है। एलपीजी सब्सिडी के लिए बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण: 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के लिए बॉयोमीट्रिक आधार प्रमाणीकरण (BAA) की आवश्यकता होगी। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अब यह प्रमाणीकरण करवाना होगा। हालांकि, यदि कोई ग्राहक इसे नहीं करवाता है, तो एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई बंद नहीं की जाएगी, लेकिन ऐसे उपभोक्ताओं को सिलेंडर मौजूदा बाजार कीमत पर खरीदना पड़ सकता है और उन्हें सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो सकता है। बैंकिंग नियमों और एफडी (FD) में बदलाव: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को 'बल्क डिपॉजिट' माना जाएगा, जबकि पहले इसकी सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक अब अपनी व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार बल्क एफडी पर अलग ब्याज दरें तय कर सकेंगे। इसके साथ ही, बैंकों को हर कामकाजी दिन सुबह 10 बजे तक (10 मिनट के ग्रेस पीरियड के साथ यानी सुबह 10:10 बजे तक) अपनी वेबसाइट पर एफडी की ब्याज दरों को अपडेट करना अनिवार्य होगा। एक ही तारीख को, एक ही राशि और समान अवधि के लिए की गई एफडी पर सभी शाखाओं में एक समान ब्याज दर लागू होगी, जिससे ग्राहकों के लिए पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण के सख्त नियम: जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान भी 1 अक्टूबर से प्रभावी हो रहे हैं। नए नियमों के तहत जन्म या मृत्यु के मामलों में देरी से पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सख्त कर दी गई है। यदि पंजीकरण में 2 साल से अधिक की देरी हो जाती है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी कर इस संबंध में जानकारी दी गई है। यह संशोधन कानून संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू हुआ है।

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