एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा: अंकुश, परवीन और लवलीना ने देश की झोली में डाले सोने के तमगे
एशियाई खेलों के दौराननिशियो जिम्नेजियम में खेले गए पुरुषों के 80 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत के अंकुश पंगाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। अंकुश ने दक्षिण कोरिया के मिनसोंग किम को 4-0 से मात देकर भारत के मुक्केबाजी अभियान का बेहद शानदार और सफल अंत किया। अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। पांच में से चार जजों ने 30-26 से फैसला अंकुश के पक्ष में दिया, जबकि एक जज ने दोनों का स्कोर 28-28 से बराबर रखा। कोरियाई मुक्केबाज को पहले दौर में चेतावनी मिलने के कारण एक अंक का नुकसान भी उठाना पड़ा। भारतीय मुक्केबाज ने आक्रामक खेल दिखाते हुए पहला दौर 4-1 से और दूसरा दौर '1-2' कॉम्बिनेशन व काउंटर पंच के दम पर 5-0 से अपने नाम किया। तीसरे दौर में बचाव और हमले का बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए उन्होंने यह दौर 4-1 से जीता और कुल मुकाबला 4-0 से अपने नाम कर लिया। इस स्वर्ण पदक के साथ आइची-नागोया खेलों में भारतीय मुक्केबाजी टीम का सफर कुल छह पदकों – तीन स्वर्ण और तीन कांस्य – के साथ बेहद यादगार रहा। इससे पहले महिला वर्ग में परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते थे। रोहतक की रहने वाली परवीन हुड्डा ने चाइनीज ताइपे की नियेन-चिन चे को 3-2 के 'स्प्लिट निर्णय' से हराकर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। उधर, अपने 29वें जन्मदिन पर खेल रही लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की जियी बाओ को 5-0 से करारी शिकस्त दी। इस सुनहरी जीत के साथ लवलीना ने 12 साल बाद भारत के लिए महिला मुक्केबाजी में पहला स्वर्ण पदक हासिल किया है, जबकि इससे पहले इंचियोन 2014 एशियाई खेलों में महान मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम ने 51 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था।