नई शिक्षा नीति पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा में शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान सत्तारूढ़ पक्ष ने राज्य के शिक्षा मॉडल और सरकारी स्कूलों में किए जा रहे सुधारों को प्रमुखता से सामने रखा। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने केंद्र की नई शिक्षा नीति को लेकर सवाल उठाते हुए शिक्षा के कथित भगवाकरण और राज्यों के अधिकारों में केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। बहस के बाद सदन ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जणमाजरा ने युवाओं को नशे से बचाने और उन्हें जीवन जीने की बेहतर समझ देने के उद्देश्य से सदन में प्रस्ताव पेश किया था। इस पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष ने पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों और सरकारी स्कूलों में हुए बदलावों पर जोर दिया। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बहस को समेटते हुए आम आदमी पार्टी सरकार के सत्ता में आने से पहले सरकारी स्कूलों की स्थिति और वर्तमान परिस्थितियों के बीच अंतर को सामने रखा। उनका मुख्य जोर सरकारी स्कूलों में सुधार और सरकार की ओर से किए गए कार्यों पर रहा। उन्होंने चर्चा के दौरान बार-बार ‘शिक्षा क्रांति’ का उल्लेख किया। हालांकि, नई शिक्षा नीति के मुद्दे पर उन्होंने विस्तार से चर्चा करने से परहेज किया। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के घटते दाखिलों के मुद्दे पर बैंस ने कहा कि पूरे देश में 1.76 करोड़ दाखिले कम हुए हैं। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश में भी दाखिलों में आई कमी का उल्लेख किया। शिक्षा मंत्री के अनुसार, अब केंद्रीय पहल के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को एक विशिष्ट आईडी दी जाती है, जबकि पहले एक ही बच्चे का छह-छह स्कूलों में दाखिला दर्ज होने की स्थिति थी। बैंस ने इस वर्ष सरकारी स्कूलों से NEET परीक्षा पास करने वाले 882 विद्यार्थियों के आंकड़े का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य के 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य किए गए हैं। इसके अलावा, इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र में और सुधारों के लिए विश्व बैंक से 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है। शिक्षा मंत्री ने ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स-2026’ का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब केरल से आगे निकल गया है। उन्होंने कहा कि अब पिछली सरकारों की तरह शिक्षकों को फंड की मांग करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सरकार स्वयं आवश्यक धनराशि उपलब्ध करा रही है। नई शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीय खतरों से बचाने के लिए सरकार को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह दक्षिणी राज्यों ने नई शिक्षा नीति के खिलाफ आवाज उठाई है, उसी तरह पंजाब को भी शिक्षा के कथित भगवाकरण को रोकने के लिए आगे आना चाहिए। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने बहस के दौरान केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र धीरे-धीरे राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप बढ़ा रहा है। खैरा के अनुसार, पहले GST के माध्यम से राज्यों के वित्तीय अधिकार प्रभावित किए गए और इसके बाद लेबर कानून लाए गए। अब केंद्र ‘एक देश, एक शिक्षा’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राणा गुरजीत सिंह ने निजी विश्वविद्यालयों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि निजी विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण के लिए अभी तक नियामक प्राधिकरण नहीं बनाया गया है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों की कथित मनमानी पर रोक लगाने के लिए नियामक व्यवस्था की आवश्यकता बताई। अरुणा चौधरी ने अपने क्षेत्र के एक कॉलेज में स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाया। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने सुझाव दिया कि स्कूलों में हर महीने विद्यार्थियों को सकारात्मक और रचनात्मक फिल्में दिखाई जानी चाहिए। बहस में प्रिंसिपल बुध राम और बसपा विधायक डॉ. नछत्तर पाल ने भी हिस्सा लिया। चर्चा के अंत में पंजाब विधानसभा ने शिक्षा से संबंधित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
Posted By: Daily Suraj Bureau