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महंगाई भत्ता विवाद: हाई कोर्ट ने कहा- अदालत को गुमराह करने पर क्यों न शुरू हो आपराधिक अवमानना की कार्रवाई

06 Oct, 2026 01:26 PM

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े मामले में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) की खामियां दूर किए जाने को लेकर दिए गए कथित गलत तथ्यों और मामले में हो रही देरी के संबंध में की है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में दिए गए तथ्यों को गलत बताया। अदालत ने नोटिस जारी कर पूछा है कि अदालत को “जानबूझकर गुमराह” करने के आरोप में उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। मुख्य सचिव को अगली सुनवाई के दौरान शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का भी निर्देश दिया गया है।
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब हाई कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से पंजाब सरकार की अपील की मौजूदा स्थिति को लेकर रिपोर्ट मिली। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष गलत बयान दिया गया था।
इससे पहले हाई कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से पंजाब सरकार द्वारा दायर अपील की वर्तमान स्थिति की जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने मुख्य सचिव को दोबारा व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश भी दिए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने सवाल किया था कि सरकार अदालत के साथ लुकाछिपी का खेल क्यों खेल रही है। यदि पंजाब सरकार ने 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी थी, तो अब तक इस मामले पर सुनवाई हो जानी चाहिए थी।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कानूनी उपाय अपनाने के लिए पहले ही तीन अवसर दिए जा चुके हैं। इसके कारण मामले की सुनवाई बार-बार टालनी पड़ी। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर मामले में समय निकालने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की खामियां दूर कर दी गई हैं और याचिका दोबारा दाखिल कर दी गई है। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मिली रिपोर्ट में इस दावे पर सवाल खड़े हुए।
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि सरकार की ओर से किए गए दावे गलत पाए गए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अब अदालत ने इसी मामले में मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने पहले पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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