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फास्ट ट्रैक अदालतों के बावजूद नहीं निपट रहे मामले: पंजाब के दिग्गजों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों का आंकड़ा आया सामने

06 Nov, 2026 11:18 AM

पंजाब के दर्जनों दिग्गज राजनीतिक नेताओं के खिलाफ अदालती मामले सालों से लंबित पड़े हैं। विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के बावजूद राज्य के 68 वर्तमान और पूर्व सांसदों (MP) तथा विधायकों (MLA) के केस किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों की हालिया कार्रवाई और छापों के कारण इस आंकड़े में और बढ़ोतरी हुई है। जिन नेताओं के मामले अदालतों में पेंडिंग हैं, उनमें राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। जिलेवार आंकड़े: लुधियाना और अमृतसर में सबसे ज्यादा लंबित मामले प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजाब के नेताओं से जुड़े 11 मामले चंडीगढ़ की अदालत में चल रहे हैं, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब और हरियाणा के कुल 158 केस पेंडिंग हैं। जिलों की बात करें तो लुधियाना में सबसे अधिक 17 केस लंबित हैं, जिनका संबंध कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, सिमरजीत सिंह बैंस और कुलदीप सिंह वैद आदि से है। इसके बाद अमृतसर जिले में 11 केस पेंडिंग हैं, जिनमें ओम प्रकाश सोनी, लालजीत सिंह भुल्लर, सांसद अमृतपाल सिंह और गुरजीत सिंह औजला आदि के नाम शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत, सुखपाल सिंह खैरा और सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े 11 मामले मोहाली जिले की अदालत में लंबित हैं। वहीं, सांसद कंगना रनौत और विधायक अमित रतन के मामले बठिंडा की अदालत में चल रहे हैं। पंजाब में 22 मामले ऐसे हैं जो पिछले एक साल या उससे अधिक समय से एक ही चरण (stage) पर अटके हुए हैं। राज्य के 19 मामलों पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे (रोक) लगाया गया है। इन प्रमुख मौजूदा और पूर्व नेताओं के नाम सूची में शामिल जिन वर्तमान विधायकों और सांसदों के केस अदालतों में पेंडिंग हैं, उनमें पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, उपाध्यक्ष जय कृष्ण रोड़ी, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, लालजीत सिंह भुल्लर, विधायक सरबजीत कौर मानूंके, कुलवंत सिंह पंडोरी, सुखपाल सिंह खैरा और सांसद कंगना रनौत के नाम शामिल हैं। वहीं, लंबित मुकदमों का सामना कर रहे पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों में बिक्रम सिंह मजीठिया, ओम प्रकाश सोनी, अनिल जोशी, अमरपाल सिंह बोनी, वीर सिंह लोपोके, सरूप चंद सिंगला, कुशलदीप सिंह ढिल्लों, सत्कार कौर गहरी, भारत भूषण आशु, शीतल अंगुराल, कुलदीप सिंह वैद, मदन लाल जलालपुर और हीरा सिंह गाबड़िया आदि शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी देशभर में स्थिति चिंताजनक उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2017 को ‘अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत सरकार’ मामले में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, देशभर में ऐसे लंबित मामलों की संख्या वर्ष 2018 के 4075 से बढ़कर वर्तमान में लगभग 4266 तक पहुंच गई है।

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