विधायक मनदीप सिंह धालीवाल ने 1984 विरोधी-सिख हिंसा को ‘जनसंहार’ घोषित करने की उठाई मांग
कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया विधानसभा में वर्ष 1984 की विरोधी-सिख हिंसा को “सिख नरसंहार” के रूप में औपचारिक मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया है। यह प्रस्ताव विधायक मनदीप सिंह धालीवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो सरी नॉर्थ से विधायक और बीसी कंजरवेटिव कॉकस के सदस्य हैं। जानकारी के अनुसार, विधायक मनदीप सिंह धालीवाल ने 20 मई को विधानसभा में इस प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव में 1984 में भारत में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उस दौरान सिखों की सामूहिक हत्याएं की गईं, उनके घरों, कारोबारों और गुरुद्वारों को निशाना बनाया गया तथा तबाही मचाई गई। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इस हिंसा से बचे लोग और उनके परिवार आज भी स्थायी मानसिक आघात का सामना कर रहे हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह पहल केवल मान्यता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की याद को सम्मान देने और उस समुदाय के साथ खड़े होने का प्रयास है, जो 1984 की घटनाओं के दर्द और सदमे को अब भी महसूस कर रहा है। धालीवाल द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में विधानसभा से अपील की गई है कि हिंसा में मारे गए लोगों, पीड़ितों और उनके परिवारों को सम्मान दिया जाए। साथ ही, सिख विरोधी नफरत, धार्मिक उत्पीड़न और नरसंहार से इनकार जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ शिक्षा, जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 1984 की हिंसा ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद भड़की थी। इसके बाद विशेष रूप से दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में हजारों सिखों की हत्या की गई थी। सिख संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उस समय संगठित हमलों और राजनीतिक मिलीभगत के आरोप लगाए थे।
Posted By: Daily Suraj Bureau