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शूलिनी मेले में मिकी माउस झूला गिरा, 15 बच्चे मलबे में फंसे; स्टाफ मौके से फरार

29 Jun, 2026 03:02 PM

राष्ट्रीय स्तर के शूलिनी मेले के अंतिम दिन रविवार शाम थोडो ग्राउंड में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मेले में लगाया गया हवा से भरा (इन्फ्लेटेबल) 'मिकी माउस' झूला अचानक पिचक गया, जिससे उस पर सवार लगभग 15 बच्चे उसके नीचे दब गए। कुछ ही क्षण पहले बच्चों की हंसी-खुशी से गूंज रहा यह विशाल झूला अचानक ढह गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। भारी सिंथेटिक सामग्री और झूले के भार के नीचे बच्चों के दबते ही चारों ओर चीख-पुकार मच गई और अभिभावक अपने बच्चों को बचाने के लिए दौड़ पड़े। घटना के बाद अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों को बचाने के बजाय झूले का ऑपरेटर और उसका स्टाफ टिकट काउंटर छोड़कर मौके से फरार हो गया। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बताया। ऊना निवासी राहुल कुमार, जो अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचे थे, ने बताया कि हादसे के समय उनका चार वर्षीय बेटा भी झूले पर मौजूद था। झूला गिरते ही चारों ओर चीखें सुनाई देने लगीं। ऐसे में राहुल कुमार और स्थानीय निवासी प्रदीप कुमार ने बिना समय गंवाए मलबा हटाना शुरू किया और एक-एक करके 12 से 15 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी तत्परता से एक बड़ी अनहोनी टल गई। घटना से परेशान अभिभावकों ने कहा कि यदि बचाव कार्य में थोड़ी भी देर हो जाती तो छोटे बच्चों का दम घुट सकता था। उन्होंने बताया कि घटना की शिकायत रविवार शाम ही पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन अब तक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि घटना के एक दिन बाद भी पुलिस इस संवेदनशील मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी कर रही है और झूले के मालिक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभिभावकों ने मांग की कि झूले के ऑपरेटर के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए, क्योंकि उसकी लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में पड़ी। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेले में लगाए गए सभी झूलों की तकनीकी जांच कराने की भी मांग की। सोलन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) साईं दत्तात्रेय वर्मा ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। इस घटना ने मेले में सुरक्षा मानकों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि झूलों के संचालन की अनुमति देने के बदले शुल्क लेने वाले नगर निगम के पास सुरक्षा संबंधी मामलों की निगरानी के लिए न तो पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और न ही आवश्यक स्टाफ।

Posted By: Daily Suraj Bureau

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