दिल्ली आबकारी नीति केस: CBI ने डिस्चार्ज आदेश को बताया ‘गैर-कानूनी
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 23 आरोपियों को दोषमुक्त (डिस्चार्ज) करने के फैसले को चुनौती दी है। करीब 974 पन्नों की याचिका में CBI ने आरोप लगाया है कि विशेष अदालत के न्यायाधीश ने साजिश के सिद्धांत की मूल आधारशिला को नजरअंदाज किया। एजेंसी के अनुसार, आरोप तय करने के चरण में ही अदालत ने प्रभावी रूप से “मिनी ट्रायल” चलाया और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की अपनी अलग व्याख्या प्रस्तुत की। CBI ने डिस्चार्ज आदेश को “स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी और गलत” करार देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपने सीमित अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया, जबकि इस स्तर पर केवल प्रारंभिक जांच तक ही सीमित रहना चाहिए था। याचिका में यह भी कहा गया है कि विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को चयनात्मक तरीके से पढ़ा और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के साक्ष्य मूल्य का समय से पहले आकलन कर लिया। CBI ने आगे तर्क दिया कि कथित साजिश को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर दिया गया और जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों के समग्र प्रभाव को नजरअंदाज किया गया। एजेंसी ने अदालत से डिस्चार्ज आदेश को रद्द करने और कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही बहाल करने की मांग की है।
Posted By: Daily Suraj Bureau